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28 मई को होगा नए संसद भवन का उद्घाटन।

135 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं को दर्शाने वाला नया संसद भवन वर्तमान संसद भवन के पास ही बनाया गया है। यह सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इस नए संसद भवन के आर्किटेक्ट बिमल पटेल हैं। आइए जानते हैं इसकी पांच मुख्य विशेषताओं के बारे में- 1. नया संसद भवन त्रिकोणीय आकार का है, जो 4 मंजिला है। इसका क्षेत्रफल लगभग 65000 वर्ग मीटर है। इसमें 3 दरवाजे हैं जिन्हें ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार नाम दिया गया है। इसमें सांसदों एवं VIP के लिए अलग एंट्री होगी। 2. नई संसद के लोकसभा में 888 सीटें हैं और इसके विजिटर्स गैलरी में 336 से ज्यादा लोगों के बैठने का इंतजाम है। जब कभी दोनों सदनों का संयुक्त सत्र होगा तो लोकसभा हॉल में 1272 सीटें हो सकती है। जबकि राज्यसभा में 384 सीटों की क्षमता होगी। लोकसभा को राष्ट्रीय पक्षी मयूर की थीम पर बनाया गया है, जबकि राज्यसभा को राष्ट्रीय फूल कमल की थीम पर बनाया गया है। 3. नई संसद भवन के बिल्डिंग में लोकसभा एवं राज्यसभा के साथ-साथ केंद्रीय लाउंज एवं संवैधानिक प्राधिकारियों के कार्यालय भी होंगे।  नई बिल्डिंग की सबसे खासियत एक संविधान हॉल है। इस हॉल मे...

UPSC Mains मध्य अठारहवीं शताब्दी का भारत विखंडित राज्यतंत्र की छाया

 प्रश्न- सुस्पष्ट कीजिये कि मध्य अठारहवीं शताब्दी का भारत विखंडित राज्यतंत्र की छाया से किस प्रकार ग्रसित था। (150 शब्द) उत्तर: मध्यकाल में मुगलों द्वारा लगभग समूचे देश को एक सूत्र में बांध दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय साम्राज्य अठारहवीं शताब्दी के प्रारंभ तक स्थिर बना रहा, किंतु औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य तेज़ी से बिखरने लगा और अठारहवीं शताब्दी के मध्य तक आते-आते देश क्षेत्रीय राज्यों में बँट गया। बंगाल में मुर्शिद कुली खाँ और उसके उत्तराधिकारियों, हैदराबाद में चिन किलिच खाँ तथा अवध में सआदत खाँ के नेतृत्व में स्वतंत्र क्षेत्रीय राज्यों की स्थापना हुई। ये क्षेत्रीय राज्य मुगल केंद्रीय सत्ता की क्षीण होती शक्ति के परिणामस्वरूप उभरकर आए। यही नहीं, अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में भी कर्नाटक और मैसूर जैसी क्षेत्रीय शक्तियों का उदय हुआ। कर्नाटक धीरे-धीरे मुगल सूबेदारों के कब्ज़े से निकल गया था और 1761 में हैदर अली ने मैसूर के राजा से गद्दी छीनकर राज्य पर अधिकार कर लिया।  इन क्षेत्रीय शक्तियों के उभरने में अंग्रेज़ों तथा अन्य यूरोपीय शक्तियों के आपसी संघ...

UPSC Mains गुप्तकालीन सिक्काशास्त्रीय कला

प्रश्न- आप इस विचार को, कि गुप्तकालीन सिक्काशास्त्रीय कला की उत्कृष्टता का स्तर बाद के समय में नितांत दर्शनीय नहीं है, किस प्रकार सही सिद्ध करेंगे? (150 शब्द ) उत्तर: सिक्कों में प्रयुक्त धातु, सिक्के का आकार और स्वरूप, सिक्कों की माप, निर्माण विधि सिक्काशास्त्र के विभिन्न पहलू हैं। चूँकि सिक्के राजकीय संवाद के वाहक होते हैं। अतः इतिहास लेखन में इनका महत्त्वपूर्ण स्थान है। गुप्तकालीन राजाओं ने सोने, चांदी, तांबे, काँसे तथा मिश्रधातु के विभिन्न आकार के सिक्के चलाए जिन पर राजाओं ने अपनी रुचि के अनुसार आकृतियाँ (राजा-रानी प्रकार, धनुर्धारी तथा वीणावादन प्रकार) अंकित कराईं। इन सिक्कों पर हिंदू पौराणिक परंपराओं को भी दर्शाया गया। सिक्कों पर उत्कीर्ण किवदंतियाँ इस काल की कलात्मक उत्कृष्टता की उदाहरण हैं। लेकिन गुप्तोत्तर काल में जहाँ एक ओर सिक्कों के उपयोग में कमी आई, वहीं इनमें मौलिकता तथा कलात्मकता का अभाव भी देखने को मिलता है। माप में भी गुप्तकालीन सिक्कों की अपेक्षा बाद के काल के सिक्कों में गिरावट देखने को मिलती है। मुद्राओं में निर्गत करने वाले राजाओं के नाम का भी उल्लेख नहीं मिलता है।...

कर्नाटक में बीजेपी के हार छह कारण

1. मजबूत चेहरे का अभाव कर्नाटक में भाजपा की हार के प्रमुख कारणों में से एक राज्य में एक मजबूत राजनीतिक चेहरे की अनुपस्थिति को देखा जा रहा है। भाजपा ने पूर्व सीएम येदियुरप्पा की जगह बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाया। लेकिन बसवराज बोम्मई बदलाव और प्रगति के मामले में जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने में विफल रहे। इसके अलावा, कांग्रेस के पास उनके प्रमुख लोगों के रूप में डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया जैसे मजबूत चेहरे हैं, जिसने भाजपा को गंभीर नुकसान किया। 2. प्रमुख नेताओं को दरकिनार कर दिया गया कर्नाटक में बीजेपी को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को इस चुनाव के दौरान दरकिनार कर दिया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार और पूर्व डिप्टी सीएम लक्ष्मण सावदी जैसे अन्य प्रमुख नेताओं को भी भाजपा ने टिकट नहीं दिया था। इसने दोनों नेताओं ने कांग्रेस ज्वाइन कर उसका नेतृत्व किया। भाजपा के तीनों प्रमुख नेता- बीएस येदियुरप्पा, जगदीश शेट्टार और लक्ष्मण सावदी राज्य में प्रमुख लिंगायत समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन नेताओं को पीछे की सीट पर बिठाने से पार्टी को न...

हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त | राज्यों को क्या कहा ? बिना शिकायत क्या FIR ?

 सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2022 के एक आदेश का दायरा तीन राज्यों से आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नफरत फैलाने वाले भाषण देने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया, भले ही कोई शिकायत दर्ज न की गई हो। शीर्ष अदालत ने पहले उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड को निर्देश दिया था कि घृणा फैलाने वाले भाषण देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। न्यायमूर्ति के एम जोसेफ़ एवं न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने नफरत फैलाने वाले भाषणों को गंभीर अपराध बताया, जो देश के धार्मिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा सकता है। पीठ ने कहा कि उसका 21 अक्टूबर 2022 का आदेश सभी क्षेत्रों के लिए प्रभावी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि मामला दर्ज करने में किसी भी देरी को अदालत की अवमानना माना जाएगा। हेट स्पीच का उदाहरण  राहुल गाँधी - सभी चोरों के उपनाम मोदी कैसे हो सकता है ? मलिकार्जुन खड़गे- मोदी एक जहरीले सांप की तरह हैं। कर्नाटक के बीजेपी नेता बसनगौड़ा पाटील यतनाल - जिस पार्टी में आप (खरगे) नाच रहे हैं, क्या सोनिया गांधी विषकन्या हैं?  स्मृति ईरानी- ये विष गांधी खान...

रिमोट वोटिंग मशीन एवं अन्य चुनाव सुधार

चुनाव आयोग ने हाल ही में राजनीतिक दलों के समक्ष रिमोट वोटिंग मशीन के इस्तेमाल का प्रस्ताव रखा था। यदि यह प्रस्ताव मान लिया गया होता तो उसके जरिए वैसे मतदातागण भी चुनाव में मतदान कर पाते जो अपने गृह राज्य से बाहर रह रहे हैं। पर राजनीतिक दलों ने उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।  इस देश की मतदाता सूचियों में नाम रहने के बावजूद लगभग 30 करोड़ मतदाता मतदान नहीं कर पाते, क्योंकि वे अपने घरों से दूर रहते हैं। उनमें से कुछ तो पोस्टल बैलेट के जरिए मतदान करते हैं, पर सारे मतदाता नहीं।  यह पहली घटना नहीं है जब चुनाव सुधार का विरोध हुआ है। 90 के दशक में तत्कालीन चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषन ने मतदाता पहचान पत्र का प्रस्ताव किया, तो भी कई राजनीतिक दलों ने उसका सख्त विरोध किया। पर जब शेषन ने धमकी दी कि हम पहचान पत्र के बिना चुनाव की तारीख की घोषणा ही नहीं करेंगे। तब मजबूरी में राजनीतिक दल मान गए। 2002 में चुनाव आयोग ने प्रस्ताव किया कि उम्मीदवार अपने शैक्षणिक योग्यता, संपत्ति और आपराधिक रिकॉर्ड का विवरण नामांकन पत्र के साथ ही दे। इस पर तत्कालीन केंद्र सरकार ने उसका कड़ा विरोध कर दिया। लेकिन सुप...

Once is a Mistake, Twice is a Choice

सब तो नहीं, लेकिन सब में अधिकांश एक ही काल चक्र में फंसे हैं। डर सा लगने लगता है। लगता है इस बार भी न हो पाएगा। लेकिन कार्य तो करना ही है। पिछली बार तो भूल हो गई थी। इसलिए वेबसाइट के पन्नों पर अपना नाम, रॉल नंबर न मिला। मिला होता तो अगले चक्र की लड़ाई लड़ने की तैयारी में लग जाते। इस बार फिर वहीं से शुरुआत करनी पड़ रही है जहां से पिछली बार की शुरुआत हुई थी। इस बार विजय पा लेना है। लेकिन क्या पिछली बार की कमियों पर विजय पा लिया है? एक घण्टे का भी समय खर्च किया है इस पर ? आत्ममूल्यांकन किया क्या ? इस बार खुद को पहले से बेहतर बनाना है। बेहतर तभी बन सकते हैं जब आपसे बेहतर का हाथ आपके साथ होगा। उन छोड़ देना होगा जिनके कारण पिछली बार बेहतर नहीं बन पाए। आगे बेहतर होने के लिए पिछले बेहतर से बेहतर का साथ लेना होगा। कार्य-कारण नियम से ही व्याख्या करने का प्रयास है। प्रयास की सार्थकता होनी चाहिए। नहीं तो बीत जाएगी यह ज़िंदगी पढ़ने में, कि पढ़ना क्या है ? मजबूत इरादों से सब कुछ संभव है। बोझिल मन से बोझिल जीवन ही बनेगा । हताशाओं से आगे बढ़ना होगा। एक खिड़की बनानी होगी जहां से उजाला दिखता रहे। बस डर से ...